भाई दूज: क्या, क्यों, कब, कैसे

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भाई दूज (यम द्वितीया)

यह क्या है

भाई दूज दिवाली का अंतिम दिन है, कार्तिक शुक्ल पक्ष का दूसरा दिन (द्वितीया)। यह भाई-बहन का उत्सव है। बहन भाई को घर बुलाती है, उसके माथे पर तिलक लगाती है, उसके सामने दीप घुमाकर आरती करती है, उसकी लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना करती है, और उसे भोजन कराती है; भाई उसे उपहार और अपना प्रेम और साथ देता है।

इस दिन के कई नाम हैं। उत्तर भारत में यह भाई दूज या भैया दूज है, और ग्रंथों में यम द्वितीया। बंगाली परिवार इसे भाई फोंटा, मराठी और कोंकणी परिवार भाऊ बीज, गुजराती परिवार भाई बीज, और नेपाली परिवार भाई टीका कहते हैं, जो तिहार का अंतिम दिन है, जब बहनें भाइयों को सात रंगों का टीका लगाती हैं। आज चचेरे-ममेरे भाई-बहन और घनिष्ठ मित्र भी अक्सर यह दिन मनाते हैं, और दूर रहने वाले भाई-बहन वीडियो कॉल पर।

यह क्यों मनाया जाता है

यम और यमुना। विष्णु पुराण सूर्य की संतानों में यम और उनकी बहन का नाम लेता है: संज्ञा ने उन्हें तीन संतानें दीं, वैवस्वत मनु, यम, और देवी यमी, यानी यमुना नदी (एच. एच. विल्सन के अनुवाद में तीसरा अंश, अध्याय 2)। इस दिन की कथा कहती है कि यमुना बहुत समय से भाई को अपने घर बुला रही थीं, और यम अपने कामों में व्यस्त होने से नहीं आ पा रहे थे। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को वे आख़िरकार आए। यमुना ने तिलक, आरती और अपने हाथ से बने भोजन से उनका स्वागत किया। कथा कहती है कि प्रसन्न होकर यम ने हर उस भाई को आशीर्वाद दिया जो इस दिन बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए, और हर उस बहन को जो भाई का स्वागत करे। यह आशीर्वाद कथा का अपना वचन है, जिसे यहाँ परंपरा के रूप में दिया गया है।

कृष्ण और सुभद्रा। एक और कथा, जो उत्तर भारत में प्रचलित है, कहती है कि नरकासुर को हराने के बाद कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के पास गए, जिन्होंने दीपों, फूलों और तिलक से उनका स्वागत किया, और यह दिन उसी भेंट की याद है।

पर्वों के नियम बताने वाले ग्रंथ इस दिन को यम द्वितीया कहते हैं। वे भविष्य पुराण उद्धृत करते हैं: इसी द्वितीया को यमुना ने अपने भाई यम को अपने घर भोजन कराया, इसलिए इस दिन भाई अपने घर नहीं, बहन के हाथ से भोजन करे और उपहार देकर उसका सम्मान करे; जहाँ बहन न हो, वहाँ चचेरी-ममेरी बहन या मित्र की बहन का सम्मान किया जाता है। इंजन यह दिन अपराह्न से तय करता है।

कथा के पीछे के ग्रंथ

यह कब मनाया जाता है

भाई दूज कार्तिक शुक्ल द्वितीया है, उस दिन जब द्वितीया अपराह्न में, यानी आपके स्थान पर दिन के पाँच बराबर भागों में से चौथे भाग में, हो, जो भाई के बहन के घर भोजन का ग्रंथों में बताया समय है। यदि द्वितीया केवल पहले दिन अपराह्न में हो, तो वह दिन लिया जाता है। अन्य हर स्थिति में, यानी जब वह दोनों दिन अपराह्न में हो या किसी भी दिन न हो, दूसरा दिन लिया जाता है। यह धर्मसिंधु के अनुसार है। जब द्वितीया दोनों दिन अपराह्न में हो, तो ऐप पहला दिन भी दिखाता है, जिसे निर्णयसिंधु, निर्णयामृत और हेमाद्रि के अनुसार, मानता है, क्योंकि उस दिन द्वितीया प्रतिपदा से युक्त होती है। ऐप दोपहर बाद का समय दिखाता है।

तिथि, गणना इंजन से

  • भाई दूज 2027: टीका वॉशिंगटन डीसी में शनिवार, 30 अक्टूबर 2027 को है (इसी शहर के लिए गणना)। दिल्ली में यह रविवार, 31 अक्टूबर 2027 को है।

तिथि आपके शहर पर निर्भर है। हमारे हर शहर की तिथि वर्ष के पृष्ठ पर है।

परंपराएँ और क्षेत्रीय रीतियाँ

  • स्मार्त (धर्मसिंधु): अपराह्न में कार्तिक शुक्ल द्वितीया; दोनों दिन हो या किसी दिन न हो, तो दूसरा दिन
  • निर्णयसिंधु, निर्णयामृत और हेमाद्रि के अनुसार: दोनों दिन अपराह्न में हो, तो प्रतिपदा से युक्त पहला दिन (ऐप यह भी दिखाता है)
  • बंगाली: भाई फोंटा
  • मराठी और कोंकणी: भाऊ बीज; गुजराती: भाई बीज
  • नेपाली: भाई टीका, तिहार का अंतिम दिन

तिथि अलग क्यों हो सकती है

अपराह्न आपके अपने दिन का भाग है, इसलिए भाई दूज अलग शहरों में अलग तारीख़ों पर पड़ सकता है, और अलग देशों में रहने वाले भाई-बहन इसे अलग दिनों पर मना सकते हैं। बंगाली परिवार भाई फोंटा के लिए अपनी पंजिका मानते हैं, जो एक दिन अलग हो सकती है, और नेपाली परिवार तिहार के लिए वह पंचांग मानते हैं जो उनका परिवार मानता है।

घर पर कैसे मनाएँ

  1. बहन कुमकुम या रोली, चावल, दीप, मिठाई, नारियल या सूखे मेवे और फूलों की थाली तैयार करती है। बहुत-सी बहनें जहाँ भाई बैठेगा वहाँ छोटी रंगोली या चौक बनाती हैं।
  2. ऐप में दिखाए गए दोपहर बाद के समय के भीतर भाई उत्तर या पूर्व की ओर मुख करके बैठता है। बहन उसके माथे पर कुमकुम और चावल का तिलक लगाती है, दीप से आरती उतारती है, उसे मिठाई खिलाती है और उसकी लंबी आयु और कुशलता की प्रार्थना करती है।
  3. भाई फोंटा में बंगाली बहनें छोटी उँगली से भाई के माथे पर चंदन लगाती हैं; नेपाली बहनें सात रंगों का टीका और मखमली फूलों की माला देती हैं।
  4. बहन भोजन परोसती है, और भाई उपहार और साथ निभाने का वचन देता है। यदि मिल न सकें, तो माता-पिता की मदद से वीडियो कॉल पर तिलक की रीति निभाएँ, और उपहार डाक से भेजें।

व्रत

भाई दूज भोज का दिन है। कुछ बहनें भाई को तिलक लगाकर भोजन कराने तक उपवास रखती हैं; यह पारिवारिक रीति है, नियम नहीं।

भोजन

बहन भाई की पसंद का भोजन बनाती है। दिवाली की बची मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं, और बहुत से घरों में खीर, पूरी और त्योहार की सब्ज़ी बनती है; बंगाली भाई फोंटा की थाली में पारिवारिक रीति के अनुसार बहुत-सी मिठाइयाँ और मछली या मांस के पकवान होते हैं।

बच्चों के लिए

नदी यमुना के एक भाई थे, यम, जो सदा बहुत व्यस्त रहते थे। यमुना उन्हें बार-बार घर बुलाती रहीं। एक दिन वे आख़िरकार आ गए! यमुना इतनी ख़ुश हुईं कि उन्होंने उनके माथे पर तिलक लगाया, दीप से आरती की और उनके लिए बढ़िया भोजन बनाया। यम इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने इस दिन मिलने वाले हर भाई-बहन को सुख की शुभकामना दी। भाई दूज पर भाई-बहन साथ समय बिताते हैं और दिखाते हैं कि वे एक-दूसरे का कितना ध्यान रखते हैं।

साथ मिलकर करने के लिए

किसी भाई, बहन या चचेरे-ममेरे भाई-बहन के लिए एक कार्ड बनाएँ, जिसमें कोई ऐसा काम हो जो आपको साथ करना अच्छा लगता है। उसे मिठाई के साथ दें, या यदि वे दूर रहते हैं तो उसकी फ़ोटो भेजें।

स्रोत

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स्रोत और लाइसेंस

हमारी व्याख्या
इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर AI की सहायता से लिखी और जाँची गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर उद्धृत करने के लिए स्वतंत्र।
समीक्षा
AI समीक्षा: उद्धृत संस्करण के विरुद्ध 2 स्वतंत्र समीक्षाएँ, 12 अक्टूबर 2026।

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