दिवाली: क्या, क्यों, कब, कैसे
AI की सहायता से लिखा गया, समीक्षित। नीचे दिए गए स्रोतों से मिलाकर जाँचा गया।
दिवाली (दीपावली)
यह क्या है
दिवाली या दीपावली का अर्थ है "दीपों की पंक्ति"। यह प्रकाश का पर्व है, जो शरद ऋतु में उस अमावस्या के आसपास पाँच दिन मनाया जाता है जिसे पंचांग आश्विन या कार्तिक मास की अमावस्या कहते हैं। घर साफ़ किए जाते हैं, संध्या को दीप जलते हैं, परिवार नए कपड़े पहनते हैं, मिठाई बाँटते हैं और एक-दूसरे से मिलने जाते हैं।
पाँच दिन हैं: धनतेरस, नरक चतुर्दशी (जिसे छोटी दिवाली भी कहते हैं), अमावस्या की रात लक्ष्मी पूजा, गोवर्धन पूजा और भाई दूज। उत्तर और पश्चिम भारत के अधिकतर परिवारों के लिए मुख्य दिन लक्ष्मी पूजा है। दक्षिण भारत के बड़े भाग में मुख्य उत्सव नरक चतुर्दशी की भोर है, जब तेल-स्नान करके नए कपड़े पहने जाते हैं। बंगाल में अमावस्या की यही रात काली पूजा की रात भी है।
हर क्षेत्र दीप जलाने की अपनी कथा कहता है, और ये सभी कथाएँ इस पर्व का हिस्सा हैं। कुछ वर्षों में दो दिन एक ही तारीख़ पर पड़ जाते हैं, तब दिवाली पाँच के बजाय चार दिन की होती है।
यह क्यों मनाया जाता है
दिवाली के साथ कई कथाएँ जुड़ी हैं। हर क्षेत्र की अपनी प्रिय कथा है, और कोई कथा दूसरी को काटती नहीं।
श्रीराम का घर लौटना। उत्तर भारत के बड़े भाग में दिवाली श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय के बाद अयोध्या लौटने की याद है। वाल्मीकि रामायण इस वापसी और नगर के आनंद का वर्णन करती है। श्रीराम का समाचार आने पर भरत आदेश देते हैं कि हर मंदिर फूलों से सजे, धूप जले और संगीत बजे (युद्ध काण्ड; ग्रिफ़िथ के अंग्रेज़ी अनुवाद में सर्ग 129)। राम के स्वागत में इसी अमावस्या को दीपों की पंक्तियाँ जलाने की रीति जीवित परंपरा से चली आई है; महाकाव्य स्वयं इस वापसी को इस रात से नहीं जोड़ता।
समुद्र से लक्ष्मी का प्रकट होना। बहुत से घरों में, और विशेषकर पश्चिम और उत्तर भारत के व्यापारी परिवारों में, यह रात सौभाग्य और समृद्धि की देवी लक्ष्मी की है। विष्णु पुराण (पहला अंश, अध्याय 9) बताता है कि देवताओं और असुरों ने क्षीरसागर को मथा, तब खिले हुए कमल पर बैठी, हाथ में कमल लिए, रूप से दमकती श्री (लक्ष्मी) लहरों से प्रकट हुईं। उनसे ठीक पहले देवताओं के वैद्य धन्वंतरि श्वेत वस्त्र पहने, हाथ में अमृत-कलश लिए निकले। बहुत से परिवार पहले दिन, धनतेरस पर, उनकी पूजा करते हैं। पर्वों के नियम बताने वाले ग्रंथ, जैसे धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु, लक्ष्मी पूजा इसी अमावस्या की संध्या में रखते हैं।
श्रीकृष्ण और नरकासुर। दक्षिण भारत और गोवा में पर्व का केंद्र नरक चतुर्दशी की भोर है। विष्णु पुराण (पाँचवाँ अंश, अध्याय 29) और भागवत पुराण (दशम स्कंध, अध्याय 59) बताते हैं कि श्रीकृष्ण ने अपनी रानी सत्यभामा के साथ नरकासुर का अंत किया, जिसने अदिति के कुंडल छीन लिए थे और हज़ारों लोगों को बंदी बना रखा था। दक्षिण की कुछ कथाओं में अंतिम प्रहार सत्यभामा करती हैं। भोर से पहले का तेल-स्नान और सुबह के दीप और आतिशबाज़ी उसी विजय का उत्सव हैं।
श्रीकृष्ण का गोवर्धन उठाना। अमावस्या के अगले दिन की कथा है कि श्रीकृष्ण ने व्रज के ग्वालों से इंद्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा, जो उनका पालन करता था। इंद्र ने तूफ़ानी वर्षा भेजी, और श्रीकृष्ण ने लोगों और गायों की रक्षा के लिए पर्वत उठा लिया। विष्णु पुराण (पाँचवाँ अंश, अध्याय 11) कहता है कि इंद्र के भेजे बादल सात दिन और सात रात नंद के गोकुल पर बरसते रहे। भागवत पुराण (दशम स्कंध, अध्याय 24 और 25) में भी यही कथा है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में यही दिन बलि प्रतिपदा भी है, जो वामन कथा के उदार राजा बलि की याद है; परंपरा मानती है कि वे इस दिन अपनी प्रजा से मिलने आते हैं।
यम का बहन के घर आना। भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं, यमराज और उनकी बहन यमुना की कथा से जुड़ा है। यमुना बहुत समय से भाई को घर बुला रही थीं। इस दिन यम आए, और यमुना ने उनके माथे पर तिलक लगाकर उन्हें भोजन कराया। कथा कहती है कि यम इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने हर उस भाई को आशीर्वाद दिया जो इस दिन बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए।
वही रातें, दूसरे परिवार। बंगाल में अमावस्या की रात काली पूजा होती है, जिसमें आधी रात को देवी काली की पूजा होती है। जैन परिवार इन दिनों को भगवान महावीर के निर्वाण के रूप में और सिख परिवार बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाते हैं; उनकी अपनी परंपराएँ हैं।
कथा के पीछे के ग्रंथ
- वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड, सर्ग 124–130: राम का अयोध्या लौटना और राज्याभिषेक, ग्रिफ़िथ का अंग्रेज़ी पद्यानुवाद (1870–74), प्रोजेक्ट गुटेनबर्ग पाठ, सर्ग 129, 'भरत से मिलन'
- विष्णु पुराण, विल्सन का अंग्रेज़ी अनुवाद (लंदन, 1840): पहला अंश, अध्याय 9 (समुद्र मंथन, धन्वंतरि और श्री), पृष्ठ 76; पाँचवाँ अंश, अध्याय 10–11 (गोवर्धन), पृष्ठ 522–529; और अध्याय 29 (नरक), पृष्ठ 581
- भागवत पुराण, स्कंध 10, अध्याय 24–25 (गोवर्धन) और 59 (नरकासुर), और स्कंध 8 (वामन और बलि); हमारे शब्दों में सार, किसी अनुवाद का उद्धरण नहीं
- कार्तिक शुक्ल द्वितीया (यम द्वितीया) को यम और यमुना: व्रत-कथा संग्रहों और पर्व-नियम के ग्रंथों की पारंपरिक कथा, हमारे शब्दों में
यह कब मनाया जाता है
लक्ष्मी पूजा अमांत पंचांग की आश्विन अमावस्या को होती है, जिसे उत्तर भारत का पूर्णिमांत पंचांग कार्तिक अमावस्या कहता है। पर्वों के नियम बताने वाले ग्रंथों (धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु, व्रतराज) का नियम, जैसा अधिकतर स्मार्त पंचांग उसे अपनाते हैं, वह दिन माँगता है जिस दिन अमावस्या प्रदोष काल में, यानी आपके स्थान पर सूर्यास्त के बाद की संध्या में, हो। कोई दिन तभी गिना जाता है जब अमावस्या उस संध्या के कम से कम एक घटी (24 मिनट) तक रहे; यदि दोनों दिन गिने जाएँ, या कोई भी नहीं, तो बाद वाला दिन लिया जाता है। बाकी चार दिनों के अपने नियम हैं, और ऐप हर एक की गणना करता है: धनतेरस वह कृष्ण त्रयोदशी है जो प्रदोष काल में हो; नरक चतुर्दशी वह कृष्ण चतुर्दशी है जो सूर्योदय से पहले, अरुणोदय में, तेल-स्नान के समय हो; गोवर्धन पूजा वह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा है जो सुबह के पहले भाग में हो; भाई दूज वह शुक्ल द्वितीया है जो अपराह्न (दोपहर बाद) में हो।
तिथि, गणना इंजन से
- दिवाली 2027: लक्ष्मी पूजा वॉशिंगटन डीसी में गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027 को है (इसी शहर के लिए गणना)। दिल्ली में यह शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027 को है।
तिथि आपके शहर पर निर्भर है। हमारे हर शहर की तिथि वर्ष के पृष्ठ पर है।
परंपराएँ और क्षेत्रीय रीतियाँ
- स्मार्त (धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु): उस अमावस्या को लक्ष्मी पूजा जो प्रदोष काल में हो
- उत्तर भारत के पूर्णिमांत मास: वही अमावस्या कार्तिक अमावस्या कहलाती है
- दक्षिण भारतीय: दीपावली की सुबह नरक चतुर्दशी है, सूर्योदय से पहले तेल-स्नान के साथ
- बंगाली: उसी अमावस्या की आधी रात को काली पूजा (ऐप इसकी गणना करता है)
- गुजराती: गोवर्धन पूजा के दिन नया वर्ष (बेस्तु वरस) आरंभ होता है
- मराठी और कन्नड़: गोवर्धन पूजा के दिन बलि प्रतिपदा (पाडवा)
- नेपाली: तिहार, जो भाई टीका पर पूरा होता है
तिथि अलग क्यों हो सकती है
अमावस्या पृथ्वी पर हर जगह एक ही क्षण आरंभ होती है, पर सूर्यास्त हर जगह अलग समय पर होता है। अमावस्या संध्या को छूती है या नहीं, यह आपके अपने सूर्यास्त पर निर्भर है, इसलिए अलग शहरों में लक्ष्मी पूजा अलग दिनों पर हो सकती है। चौदह शहरों के ग्यारह वर्षों की जाँच में केवल दो वर्ष ऐसे निकले जब सब शहरों का दिन एक था। अमेरिका महाद्वीप में यह अक्सर भारत से एक दिन पहले, और ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और फ़िजी में कभी-कभी एक दिन बाद पड़ती है। इसीलिए ऐप आपके शहर की तारीख़ दिखाता है, और जब वह अलग हो तो साथ में भारत की तारीख़ भी।
परंपराएँ भी अलग हैं। बंगाली परिवार अमावस्या की आधी रात (निशीथ काल) को काली पूजा करते हैं, इसलिए वह लक्ष्मी पूजा से अलग दिन पड़ सकती है। बंगाली परिवार अपनी लक्ष्मी पूजा कोजागरी पूर्णिमा को, दशहरे के पाँच दिन बाद, करते हैं। कुछ पंचांग संध्या के भीतर स्थिर लग्न के समय को लक्ष्मी पूजा का समय बताते हैं; ऐप वह समय नहीं निकालता, इसलिए यदि आपका परिवार उसे मानता है तो अपने पुरोहित या मंदिर से पूछें। अमांत और पूर्णिमांत पंचांगों में महीनों के नाम अलग हैं, पर दिन वही रहते हैं।
घर पर कैसे मनाएँ
- पहले के दिनों में घर साफ़ और व्यवस्थित करें। बहुत से परिवार मरम्मत, पुताई या पुराना सामान हटाने का काम करते हैं, और दरवाज़े पर रंगीन चूर्ण, चावल के आटे या फूलों से रंगोली बनाते हैं।
- धनतेरस की शाम: मुख्य द्वार पर दीप जलाएँ। बहुत से परिवार घर के बाहर यमराज के लिए दक्षिण की ओर मुख वाला एक दीप (यम दीपक) भी रखते हैं, और परिवार के स्वास्थ्य की प्रार्थना के साथ धन्वंतरि की पूजा करते हैं। नया धातु का बर्तन या सिक्का ख़रीदना इस दिन की रीति है; दिन मनाने के लिए कुछ ख़रीदना ज़रूरी नहीं।
- नरक चतुर्दशी की सुबह: सूर्योदय से पहले उठें, शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करें (अभ्यंग स्नान), अक्सर बेसन और हल्दी के उबटन के साथ। दक्षिण भारतीय घरों में यही दीपावली का मुख्य स्नान है, जिसके बाद नए कपड़े, पूजा, मिठाई और शुभकामनाएँ होती हैं। शाम को दीप जलाएँ; बंगाली परिवार इस रात पूर्वजों के लिए चौदह दीप जलाते हैं।
- लक्ष्मी पूजा की शाम: स्नान करके साफ़ या नए कपड़े पहनें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी और गणेश का चित्र या मूर्ति रखें, और यदि आपके परिवार में रीति है तो कलश (आम के पत्तों और नारियल वाला जल-पात्र) भी। घी या तेल का मुख्य दीप जलाएँ और पूजा भर उसे जलता रहने दें।
- पहले गणेश जी की, फिर लक्ष्मी जी की पूजा करें: जल, कुमकुम और हल्दी, अक्षत, कमल या गेंदे जैसे फूल, मिठाई और फल अर्पित करें। उत्तर भारत के बहुत से परिवार खील-बताशे और कुछ सिक्के चढ़ाते हैं। गुजराती व्यापारी परिवार देवी के सामने नए बही-खाते रखते हैं (चोपड़ा पूजन); दूसरे परिवार कलम, औज़ार या पढ़ाई की किताबें रखते हैं।
- अपने परिवार में प्रचलित प्रार्थनाएँ पढ़ें। आम तौर पर गणेश श्लोक "वक्रतुंड महाकाय", श्री सूक्त (ऋग्वेद के परिशिष्ट का एक सूक्त), महालक्ष्मी अष्टक, लक्ष्मी के 108 नाम, और "ॐ जय लक्ष्मी माता" तथा "ॐ जय जगदीश हरे" आरतियाँ पढ़ी जाती हैं। दक्षिण भारतीय परिवार अक्सर कनकधारा स्तोत्र पढ़ते हैं, जिसे परंपरा शंकराचार्य की रचना मानती है।
- आरती के बाद हर कमरे, दरवाज़े, खिड़कियों और बालकनी में दीप रखें। बहुत से परिवार एक दीप रात भर जलाए रखते हैं। जहाँ भवन के नियम या धुएँ के अलार्म खुली लौ की अनुमति न दें, वहाँ सुरक्षित पात्र में मोमबत्ती या बिजली की रोशनी लगाएँ। आतिशबाज़ी केवल वहीं करें जहाँ स्थानीय क़ानून अनुमति दे, और बच्चों को लौ से दूर रखें।
- गोवर्धन पूजा: बहुत से परिवार अनेक पकवान बनाकर (अन्नकूट, यानी "अन्न का पर्वत") श्रीकृष्ण को भोग लगाते हैं और फिर बाँटते हैं। उत्तर भारत के घरों में आँगन में छोटा-सा पर्वत बनाकर उसकी परिक्रमा की जाती है; विदेश में परिवार अक्सर थाली में भोजन या मिट्टी से पर्वत बनाते हैं। गुजराती परिवार इस दिन नए वर्ष की शुभकामनाएँ देते हैं, और मराठी दंपति पाडवा मनाते हैं।
- भाई दूज: बहन भाई को घर बुलाती है, उसके माथे पर कुमकुम और चावल का तिलक लगाती है, आरती करती है और भोजन कराती है; भाई उपहार देता है। बंगाली परिवार इसे भाई फोंटा, मराठी परिवार भाऊ बीज और नेपाली परिवार भाई टीका कहते हैं। दूर रहने वाले भाई-बहन अक्सर वीडियो कॉल पर यह रीति निभाते हैं।
व्रत
दिवाली मुख्य रूप से उत्सव और भोज का पर्व है, उपवास का नहीं। कुछ परिवार लक्ष्मी पूजा के दिन संध्या पूजा तक उपवास रखते हैं और फिर साथ भोजन करते हैं; कुछ बहनें भाई दूज पर भाई को तिलक करने तक उपवास रखती हैं। ये पारिवारिक रीतियाँ हैं, सबके लिए नियम नहीं। गर्भवती, बीमार, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग केवल हल्का उपवास रखें या न रखें, और पहले डॉक्टर से बात करें।
भोजन
मिठाइयाँ थाली का केंद्र हैं: उत्तर भारत में लड्डू, बर्फ़ी, काजू कतली, गुलाब जामुन और खीर; मराठी फराळ में चकली, करंजी, शंकरपाळी, चिवड़ा और बेसन के लड्डू; गुजराती मठिया और घूघरा; दक्षिण भारतीय मुरुक्कु, मैसूर पाक और अधिरसम; बंगाली संदेश और नारियल नाड़ू। गोवर्धन के अन्नकूट में दर्जनों पकवान बनते हैं, और भाई दूज पर बहन अक्सर भाई की पसंद का भोजन बनाती है।
बच्चों के लिए
बहुत समय पहले राजकुमार राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण चौदह वर्ष वन में रहे। जब वे आख़िरकार अयोध्या लौटे, तो लोग इतने ख़ुश हुए कि उन्होंने हर खिड़की और दरवाज़े पर दीप जलाकर उनका स्वागत किया। दिवाली पर परिवार भी दीप जलाते हैं: स्वागत कहने के लिए, धन्यवाद कहने के लिए, और यह दिखाने के लिए कि एक छोटा-सा दीप भी अँधेरे को पीछे हटा सकता है। बहुत से परिवार साफ़ और उजले घर में सौभाग्य की देवी लक्ष्मी का भी स्वागत करते हैं।
साथ मिलकर करने के लिए
दरवाज़े पर साथ मिलकर चावल के आटे, रंगीन चूर्ण या फूलों की पंखुड़ियों से रंगोली बनाएँ, और मिट्टी के एक सादे दीये को रंगें। किसी बड़े के साथ उसे जलाएँ, और हर कोई एक बात कहे जिसके लिए वह आभारी है।
स्रोत
- ऐप के पंचांग इंजन के लक्ष्मी पूजा, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा, भाई दूज, काली पूजा और कोजागर पूजा के नियम, उनके दिए स्रोतों सहित; ऐप की तिथियाँ केवल इसी इंजन से
- शिब चंदर बोस, बंगाल के हिंदू समाज की रीतियों पर अंग्रेज़ी पुस्तक (कलकत्ता, 1881): बंगाल में दुर्गा पूजा के बाद सबसे महत्वपूर्ण काली पूजा, कार्तिक के कृष्ण पक्ष की अंतिम रात, आधी रात की पूजा
- बंबई प्रेसिडेंसी का गज़ेटियर, खंड 9, भाग 1, गुजरात के हिंदू (बंबई, 1901), पृष्ठ 82: गुजराती साहूकार और व्यापारी दिवाली पर हिसाब पूरा करते हैं और लक्ष्मी के सामने नई बहियों की पूजा (बही-पूजन) करते हैं
- धर्मसिंधु (काशीनाथ उपाध्याय, 1790) और निर्णयसिंधु (कमलाकर भट्ट, 1612): लक्ष्मी पूजा के प्रदोष-नियम और नरक चतुर्दशी के स्नान के अरुणोदय-नियम के ग्रंथ, जैसा इंजन के नियमों में दर्ज है
- एन. डर्शोविट्ज़ और ई. एम. राइनगोल्ड, भारतीय पंचांग की गणना पर लेख (कीलहॉर्न, 1897 के हवाले से पर्व-नियम): तिथि वाले पर्वों के लिए इंजन का संदर्भ
- वाल्मीकि रामायण, युद्धकांड, ग्रिफ़िथ का अंग्रेज़ी पद्यानुवाद (1870–74)
- विष्णु पुराण, विल्सन का अंग्रेज़ी अनुवाद (लंदन, 1840)
- विकिपीडिया, दिवाली पर लेख: पाँच दिनों और क्षेत्रीय रीतियों की पृष्ठभूमि
संबंधित मार्गदर्शिकाएँ
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स्रोत और लाइसेंस
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर AI की सहायता से लिखी और जाँची गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर उद्धृत करने के लिए स्वतंत्र।
- समीक्षा
- AI समीक्षा: उद्धृत संस्करण के विरुद्ध 2 स्वतंत्र समीक्षाएँ, 12 अक्टूबर 2026।