श्रीमद्भगवद्गीता · अध्याय 2: सांख्ययोग · वक्ता: कृष्ण
श्रीमद्भगवद्गीता 2.19 का अर्थ
श्रीमद्भगवद्गीता (Bhagavad Gita) 2.19: कृष्ण कहते हैं कि जो आत्मा को मारने वाली समझता है और जो उसे मरी हुई मानता है, दोनों ही नहीं जानते।
श्रीमद्भगवद्गीता 2.19
य एनं वेत्ति हन्तारं यश्चैनं मन्यते हतम् ।उभौ तौ न विजानीतो नायं हन्ति न हन्यते ॥
Ya enam vetti hantaram yashchainam manyate hatam
Ubhau tau na vijanito nayam hanti na hanyate
ya enaṃ vetti hantāraṃ yaścainaṃ manyate hatam |
ubhau tau na vijānīto nāyaṃ hanti na hanyate ||
हमारा अर्थ कृष्ण कहते हैं कि जो आत्मा को मारने वाली समझता है और जो उसे मरी हुई मानता है, दोनों ही नहीं जानते। आत्मा न किसी को मारती है, न मारी जाती है।
English meaning Krishna says that anyone who thinks the self kills, and anyone who thinks the self is killed, both fail to understand. The self does not kill and is not killed.
शब्दार्थ
हर शब्द, शब्दकोश के पृष्ठ के साथ
शब्दार्थ
- यः yaḥ जो (सर्वनाम (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: yad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 2
who, which, what, whichever, whatever, that
- एनम् enam इसे (सर्वनाम (पुंलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: 1. ena, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 232, स्तंभ 1
he, she, it; this, that
- वेत्ति vetti जानता है (वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. vid, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 963, स्तंभ 2
to know, understand, perceive, learn
- हन्तारम् hantāram मारने वाला (संज्ञा (पुंलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: hantṛ, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1288, स्तंभ 1
slaying, killing, a slayer, killer
- यः yaḥ जो (सर्वनाम (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: yad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 844, स्तंभ 2
who, which, what, whichever, whatever, that
- च ca और (अव्यय) शब्दकोश: 2. ca, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 380, स्तंभ 1
ind. and, both, also, moreover, as well as
- एनम् enam इसे (सर्वनाम (पुंलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: 1. ena, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 232, स्तंभ 1
he, she, it; this, that
- मन्यते manyate मानता है (वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: man, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 783, स्तंभ 1
to think, believe, imagine, suppose, conjecture
- हतम् hatam मारा गया (भूतकालिक कृदन्त (पुंलिंग), द्वितीया एकवचन) शब्दकोश: hata, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1287, स्तंभ 2
smitten, killed, slain
- उभौ ubhau दोनों (सर्वनाम (पुंलिंग), प्रथमा द्विवचन) शब्दकोश: ubha, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 216, स्तंभ 2
both
- तौ tau वे (सर्वनाम (पुंलिंग), प्रथमा द्विवचन) शब्दकोश: tad, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 434, स्तंभ 1
m. he, f. she, n. it, that, this
- न na नहीं (अव्यय) शब्दकोश: 2. na, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 523, स्तंभ 1
ind. not, no, nor, neither
- विजानीतः vijānītaḥ जानते हैं (वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष द्विवचन) शब्दकोश: vi-jñā, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 961, स्तंभ 1
to distinguish, discern, observe, investigate, recognize, ascertain, know, understand
- न na नहीं (अव्यय) शब्दकोश: 2. na, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 523, स्तंभ 1
ind. not, no, nor, neither
- अयम् ayam यह (सर्वनाम (पुंलिंग), प्रथमा एकवचन) शब्दकोश: 1. idam, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 165, स्तंभ 2
- हन्ति hanti मारता है (वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. han, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1287, स्तंभ 2
to smite, slay, hit, kill, mar, destroy
- न na नहीं (अव्यय) शब्दकोश: 2. na, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 523, स्तंभ 1
ind. not, no, nor, neither
- हन्यते hanyate मारा जाता है (कर्मवाच्य, वर्तमान काल (लट्), प्रथम पुरुष एकवचन) शब्दकोश: 1. han, मोनियर-विलियम्स 1899, पृ. 1287, स्तंभ 2
to smite, slay, hit, kill, mar, destroy
सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त) के अनुवाद
Kashinath Trimbak Telang, 1882। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 44–45।
He who thinks it to be the killer and he who thinks it to be killed, both know nothing. It kills not, is not killed1.
पाद-टिप्पणियाँ (अनुवादक की अपनी) - Cf. Katha-upanishad, p. 104. ↩
3 अनुवादों की तुलना करें
Kashinath Trimbak Telang, 1882। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 44–45।
He who thinks it to be the killer and he who thinks it to be killed, both know nothing. It kills not, is not killed1.
पाद-टिप्पणियाँ (अनुवादक की अपनी) - Cf. Katha-upanishad, p. 104. ↩
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Annie Besant, 1895। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 28।
He who regardeth This1 as a slayer, and he who thinketh It is slain, both of them are ignorant. It slayeth not, nor is It slain.
पाद-टिप्पणियाँ (अनुवादक की अपनी) - The Dweller in the body. ↩
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Swami Swarupananda, 1909 (पहली बार 1907 में छपा)। सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। पृष्ठ 35।
He who takes the Self to be the slayer, he who takes It to be the slain, neither of these knows. It does not slay, nor is It slain.
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संस्कृत पाठ: The Bhagavad-Gita, or The Lord's Song, with the text in Devanagari and an English translation, 1922। अर्थ: पूजादीप के लिए AI की सहायता से लिखे और जाँचे गए। स्रोत और बदलाव
परिवार जो प्रश्न पूछते हैं
गीता 2.19 कौन कहता है?
यह श्लोक कृष्ण कहते हैं, अध्याय 2 (सांख्ययोग) में।
संस्कृत पाठ कहाँ से लिया गया है?
संस्कृत पाठ: The Bhagavad-Gita, or The Lord's Song, with the text in Devanagari and an English translation, 1922। अर्थ: पूजादीप के लिए AI की सहायता से लिखे और जाँचे गए। स्रोत देखें
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स्रोत और लाइसेंस
- संस्कृत पाठ
- The Bhagavad-Gita, or The Lord's Song, with the text in Devanagari and an English translation (Annie Besant, G. A. Natesan & Co., Madras, 1922). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। इन पृष्ठों का संस्कृत पाठ इसी मुद्रण के पृष्ठ-चित्रों से पढ़ा गया है।
- अनुवाद
- The Bhagavadgîtâ with the Sanatsugâtîya and the Anugîtâ, translated by Kâshinâth Trimbak Telang (The Sacred Books of the East, vol. VIII, ed. F. Max Müller) (Kashinath Trimbak Telang, F. Max Müller, Clarendon Press, Oxford, 1882). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
- अनुवाद
- The Bhagavad Gîtâ, or The Lord's Song, translated by Annie Besant (Annie Besant, Theosophical Publishing Society, London, 1895). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। जैसा छपा है, वैसा ही दिखाया गया।
- संस्कृत पाठ
- Srimad-Bhagavad-Gita, with Sanskrit Text; Paraphrase with Word-by-word Literal Translation; English Rendering and Comments, Index, &c., by the Swami Swarupananda (Himalayan Series, No. XX) (Swami Swarupananda, The Editors and Publishers, Advaita Ashrama, Mayavati, Prabuddha Bharata Press, Mayavati, Almora, Himalayas, 1909). सार्वजनिक डोमेन (कॉपीराइट-मुक्त)। केवल यह दिखाने के लिए कि पाठ कितना पुराना है। इस पृष्ठ का देवनागरी पाठ एक पठन-पाठ है, इस मुद्रण से नहीं लिया गया।
- प्रचलित पाठ
- इस पाठ में 32 शब्द आज के प्रचलित रूप में हैं; इन्हें sanskritdocuments.org; संस्कृत विकिस्रोत; गीता प्रेस, गोरखपुर; ग्रेटिल, गॉटिंगेन और भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट के पाठ से मिलाकर जाँचा गया।
- हमारी व्याख्या
- इस साइट के लिए यहाँ दिए स्रोतों के आधार पर AI की सहायता से लिखी और जाँची गई व्याख्या। यह अनुवाद नहीं है, और पाठ को पढ़ने का एकमात्र तरीका भी नहीं है। श्रेय देकर उद्धृत करने के लिए स्वतंत्र।
- समीक्षा
- AI समीक्षा: उद्धृत संस्करण के विरुद्ध 2 स्वतंत्र समीक्षाएँ, 15 अक्टूबर 2026।